Monday, January 10, 2011

Shri Ram Chandra Kripalu Bhajman..

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन ..

श्रीराम - स्तुति

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम् .
नवकञ्ज लोचन कञ्ज मुखकर कञ्जपद कञ्जारुणम् .. १..

कंदर्प अगणित अमित छबि नव नील नीरज सुन्दरम् .
पटपीत मानहुं तड़ित रुचि सुचि नौमि जनक सुतावरम् .. २..

भजु दीन बन्धु दिनेश दानव दैत्यवंशनिकन्दनम् .
रघुनन्द आनंदकंद कोशल चन्द दशरथ नन्दनम् .. ३..

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदार अङ्ग विभूषणम् .
आजानुभुज सर चापधर सङ्ग्राम जित खरदूषणम् .. ४..

इति वदति तुलसीदास शङ्कर शेष मुनि मनरञ्जनम् .
मम हृदयकञ्ज निवास कुरु कामादिखलदलमञ्जनम् .. ५..

मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर साँवरो .
करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो .. ६..

एही भांति गोरी असीस सुनी सिय सहित हिं हरषीं अली .
तुलसी भावानिः पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मंदिर चली .. ७..


जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे॥

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